
जिदंगी मे दो शब्द बहुत खास है:- प्रेम और ध्यान।
क्योंकि ये अस्तित्व के मंदिर के दो विराट दरवाजे हैं।
एक का नाम प्रेम, एक का नाम ध्यान।
चाहो तो प्रेम से प्रवेश कर जाओ, चाहो तो ध्यान से प्रवेश कर जाओ।
शर्त एक ही हैः अहंकार दोनों में छोड़ना होता है!
Zindagi Mein Do Shabda Bahut Khas Hai,
Prem Aur Dhyan!
Kyoki Ye Astitva Ke Mandir Ke Do Virat Darwaje Hai,
Ek Ka Naam Prem, Ek Naam Dhyan
Chaho To Prem Se Prvesh Kar Jao,
Chaho To Dhyan Se Prvesh Kar Jao,
Shart Ek He Hai…
Ahankar Dono Mein Chhodna Hota Hai!

अपने अंदर से अहंकार को निकाल कर
स्वयं को हल्का कीजिये,
क्यूँकि ऊँचा वही उठता है जो,
हल्का होता है!

अहंकार की बस एक खराबी है,
ये कभी आपको महसूस ही
नहीं होने देता कि आप गलत हैं!

अहंकार में अंधे इंसान को
न तो अपनी गलतियाँ दिखती है!
और न ही दूसरों की अच्छी बातें!

अहंकार को छोड़े बिना,
सच्चा प्रेम नहीं किया जा सकता!
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