
किसी की बुराई तलाश करने वाले
इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है
जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोड़कर
केवल जख्म पर ही बैठती है!!
Kisi Ki Burai Talash Karne Wale
Insaan Ki Misaal Us Makkhi Ki Tarah Hai
Jo Sare Khoobsurat Jism Ko Chhodkar
Kewal Jakhm Par He Bathti Hai!!

जो इंसान सभी में बुराई ढूंढता है,
हकीकत में वो अपनी बुराई ही
दूसरों में ढूंढ रहा होता है,
क्यांकि इंसान जैसा होता है
वैसा ही दूसरों में तलाश करता है!

बुराई ढूंढने का शौक है तो,
शुरूआत खुद से कीजिए
दूसरों से नहीं!
बुरे को अच्छे में भी बुरा दिखा,
अच्छे को बुरा में भी अच्छा दिखा,
सब नजरिए का खेल है,
जो जैसा उसको वैसा ही दिखा!
कभी किसी की बुराई मत करो,
क्योंकि बुराई तुम में भी है,
और जुबान दूसरों के पास भी है!
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