
किसी के घर जाओ तो
अपनी “आंखो” को इतना काबू में रखो
कि उसके “सत्कार” के अलावा
उसकी “कमियाँ” न दिखे
और जब उसके घर से निकलो तो
अपनी “ज़ुबान” काबू में रखो
ताकि उसके घर की
“इज़्ज़त” और “राज़”
दोनो सलामत रहे।
Kisi Ke Ghar Jao To
Apni Ankho Ko Etna Kabu Main Rakkho,
Ki Uske “Satkar” Ke Aalawa
Uski “Kamiya” Na Dikhe,
Aur Jab Uske Ghar Se Niklo To
Apni Jubaan Kabu Main Rakkho Taki Uske Ghar Ki
“Ijjat” Aur “Raj” Dono Salamat Rahe!

घर के बाहर भले ही दिमाग ले जाओ,
क्योंकि दुनिया एक बाजार है,
लेकिन घर के अंदर सिर्फ दिल ले जाओ,
क्योंकि वहाँ एक परिवार है!

घर कच्चा हो या पक्का, छोटा हो या बड़ा,
कोई फर्क नहीं पड़ता,
अगर मिठास ना हो तो मेहमान तो दूर की बात है,
चींटियाँ तक नहीं आती घर में!
इत्र से कपड़ों का महकाना,
कोई बड़ी बात नहीं है,
मजा तो तब है
जब आपके किरदार से
खूशबू आये!
जिस गांव में बारिश न हो,
वहाँ की फसले खराब हो जाती हैं,
और जिस घर में धर्म और संस्कार न हो,
वहाँ की नस्लें खराब हो जाती है!
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