
दोहा:- कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर!
ना काहू से दोस्ती, न काहू से बैर!!
अर्थ:- इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं,
कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो!
Doha:- Kabira Khada Bazar Mein, Mange Sabki Khair
Na Kahu Se Dosti, Na Kahu Se Bair!
Meaning:- Is Sansar Mein Aakar Kabir Das Ji Apne Jeevan
Mein Bas Yahi Chahte Hain Ki Sabka Bhala Ho Aur
Sansar Main Yadi Kisi Se Dosti Nahi To Dusmani Bhi Na Ho

कहे कबीर कैसे निबाहे, केर बेर को संग !
वह झूमत रस आपनी, उसके फाटत अंग !!
अर्थात् :- कबीर कहते हैं, कि भिन्न प्रकृति के लोग एक साथ नहीं रह सकते। जैसे केले और बेर का पेड़ साथ-साथ नहीं लगा सकते। क्योंकि हवा से बेर का पेड़ हिलेगा और उसके कांटों से केले के पत्ते कट जायेंगे।