जाने क्यों लोगो को ठंड लग रही!

Nafrat Ki Aag Winter Sardi Quotes in Hindi
Nafrat Ki Aag Winter Sardi Quotes in Hindi

पूरी दुनिया नफरतों की आग में जल रही
फिर भी ना जाने क्यों लोगो को ठंड लग रही!


I love winter…
When blossom becomes
Sign of love at every center
I love when birds becomes singer
made my soul shiner than ever
I love when it made me shiver &
Joining stars with finger it
Made my dreams glitter


कोहरे का घूंघट उठा के
धूप ज़रा शरमाई है
आ जाओ सखियों
धूप की मुँह दिखाई है!


in a ceramic cup
I hesistantly gulp
and my teeth chatter
axing all the warmth
from past summer.
Yet, spices of your words,
love, I sprinkle on
my tongue now
to balance the PH
to let poems etch.


सर्द ज़मी है और हम भी गमगीन है आज कल
पता नही ये मौसम फिर कब बदलेगा!


रज़ाई ओढ़ कर भी ठंड का रोना रोने वाले,
तूने देखे नहीं शायद फुटपाथ पे सोने वाले,
फटे-पुराने अखबारों पर खुद खाते हैं खाना,
अपने आंसुओं से घर घर बरतन धोने वाले,
बढ़ती ठंड देख मुझको ये डर लगता है कि,
ये बच्चे शायद जल्द ही हैं अनाथ होने वाले।


सर्दी की जब मार हो और रजाई में आराम हो
सुबह की प्यारी नींद हो और मुख में राम नाम हो

मच्छरों का साम्राज्य हो या इम्तिहान का वक्त हो
आराम का ना नाम हो नींद जब हराम हो

गुस्से में आँखे लाल हो बिना नशे के वो खुमार हो
नींद जब तक पूरी ना हो सर पे भूत सवार हो

सुकून वाली रात हो दिन में होश हवाश हो
नींद जब पूरी हो मच्छरों का जब नाश हो

कॉफी का प्याला हाथ हो किताब जब साथ हो
मोबाइल हमसे दूर हो तो पढ़ाई भरपूर हो


दिन ढला और रात आई
वो हमारे पास आई
हम भी उसकी बाहों में लिपटकर सो गए
वो सर्द रातों की गरम रजाई!


हां, बला की खूबसूरत हो तुम,
पर कभी इन सर्दी के फूलों पर गौर किया है तुमने !!


इन सर्द अंधेरी रातों में
रज़ाई का सहारा तो लेते हैं सभी
रोने के लिए नहीं सोने के लिए
किया होगा तुम ने भी यही
बदनांम कर दिया यादों को किसी की!!


जाड़ों की गुनगुनी धूप तुम
तन के आलोचक रोमों को
कालिदास की उपमा जैसी
ऋतु-मुखरा की कटि पर बजतीं
किरणों की करघनी धूप तुम
जाड़ों की गुनगुनी धूप तुम …


आजकल डर लगने लगा है, उन चलती हवाओं से ।।
जो चल रही है इन मौसमी बाहों में ।
अब तो जी चाहता है, ना छोड़ूँ इस बिस्तर को ।।
अब तो बिस्तर भी जन्नत सा, जो लगने लगा है ।


धीरे धीरे आदतें अपनी खोने लगा हूं
तुमको देखा और तुमसा मैं होने लगा हूं
हर रोज आती हो तुम ख्वाबों में मेरे
तुमसे मिलने के लिए,
थोड़ा ज्यादा मैं सोने लगा हूं ।।
“तुमको देखा और तुमसा मैं होने लगा हूं”


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