
हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए दौड़ रहा है…
पर इंसानियत के लिए कोई कदम भी नहीं बढ़ा रहा!!
Har Koi Doctor Ya Engineer Banne Ke Liye Daud Raha Hai,
Par Insaniyat Ke Liye Koi Kadam Bhi Nahi Badha Raha!!

इंसान की इंसानियत
उसी समय खत्म हो जाती है,
जब उसे दूसरों के दु:ख में
हँसी आने लगती है!

सिर्फ इंसान होना काफी नहीं,
इंसान के अंदर
इंसानियत का होना भी जरूरी है!

वो तो निभाते नहीं है लोग आजकल,
वरना इंसानियत से बड़ा रिश्ता कौनसा है!

इंसान कितना भी बड़ा बन जाये,
पर इंसानियत उसको उससे भी बड़ा बना देता है!
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