
दोहा:- दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत!!
अर्थ:- यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह
दूसरों के दोष देखकर हंसता है, तब उसे अपने
दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत!
Doha:- Dosh Paraye Dekhi Kari, Chala Hasant Hasant,
Apne Yaad Na Aawai, Jinka Aadi Na Ant!
Meaning:- Yah Manushya Ka Subhav Hai Ki Jab Wah
Dusron Ke Dosh Dekhkar Hasata Hai, Tab Use Apne
Dosh Yaad Nahi Aate Jinka Na Aadi Hai Na Ant!

मल मल धोए शरीर को, धोए न मन का मैल,
नहाए गंगा गोमती, रहे बैल के बैल!
अर्थ:- लोग अपने शरीर को तो बहुत अच्छी तरह साफ करते हैं।
लेकिन, मन के मैल की सफाई नहीं करते हैं।
वे गंगा और गोमती जैसी नदी में नहाकर खुद को,
पवित्र मानते हैं, लेकिन वे मूर्ख ही रहते हैं!
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