
भूख से बड़ा ”मजहब” और रोटी से बड़ा ”ईश्वर”
कोई हो तो बता देना मुझे भी ”धर्म” बदलना है!
Bhukh Se Bada Mazhab Aur Roti Se Bada Iswaar
Koi Ho To Bada Dena…
Mujhe Bhi “Dharma” Badalna Hai!

भूख ने
निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें साहब,
कैसे गुजारी है
रात ये ना पूछो तो अच्छा है!
भूख सारी मर्यादाएँ तोड़ देती है,
और पैसा इंसानियत!

भूख मौत से भी बड़ी होती है,
सुबह मिटाओ तो
शाम को फिर खड़ी होती है!
वो राम की खिजड़ी भी खाता है,
रहीम की खीर भी खाता है,
वो भूखा है जनाब,
उसे कहाँ मजहब समझ आता है!
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