Bhagwan Shri Krishna Motivational Quotes in Hindi

Bhagwan Shri Krishna Motivational Quotes in Hindi Status
Bhagwan Shri Krishna Motivational Quotes in Hindi Status

दिव्याता केवल शक्तिशाली होने में नहीं,
बल्कि वास्तविक दिव्याता दूसरों में
शक्ति जाग्रत करने में है…


मुझमें जीवन और मृत्यु देने का वरदान दे दो,
ऐ मेरे कृष्णा मुझे इतना सम्मान दे दो,
आज भारत की सम्मान देखों हैं खतरें में,
भारतीय हैं भारत को लगे हैं कतरने,
अब इनको मार के नया भारत बनाऊंगा,
जहाँ सिर्फ होंगे एक भारतीय पहले,
फिर चाहे वो तुम्हे पूजे किसी भी रंग में,
बहुत बुरा हाल हैं देख कान्हा तेरे देश का,
बहन बेटियों का रह गया आबरूं अब शेष क्या,
इनको जो गलत निगाहों दे देखे उन्हें हम मिटा दे,
बस इतनी शक्ति कान्हा मुझे दे दो।
मुझमें जीवन और मृत्यु देने का वरदान दे दो,
ऐ मेरे कृष्णा मुझे इतना सम्मान दे दो।।


बस्ती है जान मेरी उनमें,
वह और कोई नहीं कान्हा है मेरे,
जॉब भी कोई मुसीबत आए तो साथ होते है मेरे,
कैसे उनसे दूर जाऊ मेरी रूह में भी वही बस्ते है।


Ajeeb Maya Thi Un Yugo Ki Bhi
Ram Aur Sita Mile Bhi Toh Aise Ki
Kabhi Ki Ek Dusre Ke Ho Hee Nahi Paaye.
Unka Aadha Jeevan Lanka Mein Beet Gaya,
Aadha Van Mein Balmiki Ke Saath Aur Jab,
Saath Rehne Ja Waqt Aaya Toh
Khudki Pavitrata Saabit Karne
Ke Liye Dharti Maa Ki Godh
Mein Chali Gayi.
Waise He Radha Aur Krishna
Pura Jeevan Ek Dusre Ke Naam
Karke Bhi Rooh Toh Mil Gayi
Ek Dusre Se Par Ek Dusre Ko
Kabhi Apna Bana Nahi Paaye.


मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ,
ओ मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ॥
एक दिवानी – राह निहारे ,-२
आ जाये – उसको ले जाये ॥
मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ॥
वो बावरी सुद भूली रे , -२
आ जाये -उसे संभाल ले ॥
मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ॥
उसकी बांसुरी तान को तड़पे रे ,-२
आ जाये –
तो तान समा जाये ॥
मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ,
ओ ( मइया -2 जाकर अपने कृष्ण से कह दो ॥)-२
कृष्ण से कह दो ॥ -२


राधे राधे
हे राधे तुम प्राण प्रिये
मनमोहन की आधार प्रिये
तुम्हरी अखियन उनसी चितवन
मोहन राधे एक जान प्रिये
न साँस चले न ह्रदय चले
एक दूजे बिन राधे मोहन
एक दूजे की धड़कन तड़पन
अनुभव करते राधे मोहन
मन एक ही है तन अलग अलग
है प्रेम की अद्भुत परिभाषा
साथ न हो पर साथ ही हों
ऐसी है मोहन की राधा


प्रेम कृष्ण की बांसुरी, राधा बंशी की तान…!
सुर है राधे बंशी की, कृष्ण प्रेम का धाम……!!


अब तो,
रुकमणी खुद बुलाएगी,
क्रिष्न को!
कि आओ, और मुझे ले जाओ।
अपना बना के,
शिशुपाल से बचाके।।


है प्रीत अतीव अभिन्न सखी, मम प्राण आधार तुम्ही राधे,
सुर ताल तुम्ही हो बंशी की, मोहन का सार तुम्ही राधे,
ढिग ढिग अँखियन सो नीर बहे, केहि भांति विछोह सहूँ राधे,
है श्याम कहाँ बिन तोर प्रिये, मम हृदय उद्गार तहूँ राधे..


तृष्णा छिपाएं कंठ में चातक
देखे आकाश को दिवा-राति
यूंही कृष्णा की आस में मीरा
तड़पे तृष्णा में चातक भांति
स्वाति नक्षत्र मेघ कण से जैसे
चातक तृष्णा मिटाता है
यूंही मीरा नित दिन हर क्षण
बस कृष्णा रट लगाती है
तृष्णापूरित तान रूदित स्वर में
वो गाती कृष्णा की विरह गान
पर तृष्णा ही है जीवन जिसका
वो तृष्णा से ही क्यों त्यागे प्राण?

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