
अपने ही अपनों से करते हैं
अपनेपन की अभिलाषा…
पर अपनों ने ही बदल रखी है,
अपनेपन की परिभाषा…
Apne He Apnon Se Karte Hain,
Apnepan Ki Abhilasha…
Par Apnon Ne He Badal Rakhi Hai,
Apnepan Ki Paribhasha…

झूठा अपनापन तो हर कोई जताता है,
यकीन मत करना हर किसी पर
क्योंकि करीब है कोई कितना,
यह तो वक़्त ही बताता है!

अपनापन, परवाह,
आदर, और समय
ये वो दौलत हैं, जो हमारे
अपने हमसे चाहते हैं!

जो अपनेपन का एहसास दिलाये
वही अपना बाकी सब पराये!

अपनापन छलके जिसकी बातों में,
सिर्फ कुछ ही लोग होते हैं लाखों में!
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