
दुखी सब है संसार में कौन है जो सुखी है,
किसी को अपना दुख दर्द देता है
तो किसी को दूसरों का सुख दर्द देता है!
Dukhi Sab Hain Sansar Main
Koun Hai Jo Sukhi Hai,
Kisi Ko Apna Dukh Dard Deta Hai
To Kisi Ko Dusron Ka Sukh Dard Deta Hai!

सुख का अर्थ है,
जो मिल रहा है, उसका ही आनंद लेना,
दुख: का अर्थ है, मुझे और चाहिए!

कम उम्र में मिला हुआ सुख,
इंसान को कभी समझदार नहीं बनने देता
और कम उम्र में मिला हुआ दु:ख,
इंसान को समझदारी का उस्ताद बना देता है!

दु:खी होने का कारण है,
अपनी इच्छाओं को और दूसरों से आशाओं को बढ़ाते जाना है,
जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं और आशाओं को बहुत कम कर देता है,
तभी वह सुखी हो पाता है!
इस संसार में लगातार किसको सुख प्राप्त होता है,
अर्थात् कोई सदा सुखी नहीं रह सकता,
कभी-न-कभी वह कष्टों में पड़ता ही है,
सुख-दुख का संबंध दिन-रात की तरह है!
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